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ॐ जय सांईं बाबा, जय जय सांईं बाबा। सच्चिदानंद सदगुरु, साईं बाबा॥ ॐ जय सांईं बाबा।
ॐ जय सांईं बाबा, जय जय सांईं बाबा
ॐ जय सांईं बाबा, जय जय सांईं बाबा। सच्चिदानंद सदगुरु, साईं बाबा॥ ॐ जय सांईं बाबा।
शिरडी के निवासी बाबा, फकीर का भेष धारी। मस्जिद में रहने वाले, सबको प्रेम से पुकारी। सबका मालिक एक है, सभी धर्म को मानते। हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई, सबको समान जानते।
धूनी रमाते रहते, सदा अग्नि जलती। भक्तों की मनोकामना, झट से पूर्ण करती। दक्षिणा मांगते सांईं, पर देते करोड़ों। अल्लाह मालिक कहकर, भक्तों के संकट तोड़े।
श्रद्धा सबुरी रखना, यही सांईं की शिक्षा। जो इसे अपनाता है, पूर्ण होती उसकी इच्छा। गुरुवार के दिन आती, भीड़ शिरडी धाम में। सांईं के दर्शन पाके, मिल जाता आराम।
जो कोई आरती सांईं की, भक्ति से गावे। कहत दास तू सांईं प्रभु, मुराद पूरी पावे॥ ॐ जय सांईं बाबा।