देवताओं की दिव्य आरतियाँ
गणेश, शिव, हनुमान, लक्ष्मी, दुर्गा और अन्य देवताओं की पवित्र आरतियाँ — पूर्ण बोल, अनुवाद और अर्थ के साथ।
Lord Kailasavasiशीश गंग अर्धन्ग पार्वतीसदा विराजत कैलासी। नन्दी भृन्गी नृत्य करत हैं,धरत ध्यान सुर सुखरासी॥
Shivaॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
Shri Bhairavaसुनो जी भैरव लाड़िले,कर जोड़ कर विनती करूँ। कृपा तुम्हारी चाहिए,मैं ध्यान तुम्हारा ही धरूँ। मैं चरण छुता आपके,अर्जी मेरी सुन लीजिये॥
Om Jai Jagdish Hareॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
Lord Badarinathaजय जय श्री बदरीनाथजयति योग ध्यानी॥ निर्गुण सगुण स्वरूप,मेधवर्ण अति अनूप। सेवत चरण सुरभूप,ज्ञानी विज्ञानी॥
Lord Narasimhaॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे। स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे,स्तम्भ फाड़ प्रभु प्रकटे, जन का ताप हरे॥
Narsingh Kunwarआरती कीजै नरसिंह कुँवर की।वेद विमल यश गाऊँ मेरे प्रभुजी॥ पहली आरती प्रह्लाद उबारे।हिरणाकुश नख उदर विदारे॥ दूसरी आरती वामन सेवा।बलि के द्वार पधारे हरि देवा॥
Shri Purushottama Deva Kiजय पुरुषोत्तम देवा,स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा। महिमा अमित तुम्हारी,सुर-मुनि करें सेवा॥
Shri Dhanvantariजय धन्वन्तरि देवा,जय धन्वन्तरि जी देवा। जरा-रोग से पीड़ितजन-जन सुख देवा॥
Shri Lakshminarayanaजय लक्ष्मी-विष्णो।जय लक्ष्मीनारायण, जय लक्ष्मी-विष्णो।जय माधव, जय श्रीपति,
Pitu Matu Sahayaka Swami Sakhaपितु मातु सहायक स्वामी सखा,तुम ही एक नाथ हमारे हो। जिनके कुछ और आधार नहीं,तिनके तुम ही रखवारे हो।
Shri Girirajaॐ जय जय जय गिरिराज,स्वामी जय जय जय गिरिराज। संकट में तुम राखौ,निज भक्तन की लाज॥
Shri Govardhan Maharajaश्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ। तोपे पान चढ़े तोपे फूल चढ़े,तोपे चढ़े दूध की धार। तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
Shri Radha Mata आरती श्री वृषभानुसुता की,मंजुल मूर्ति मोहन ममता की। त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,विमल विवेकविराग विकासिनि। पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,सुन्दरतम छवि सुन्दरता की॥
Shri Hanumanजय हनुमन्त सन्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥ जन के काज विलम्ब न कीजै।आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
Ekadashi Mataॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता। विष्णु पूजा व्रत को धारण कर,शक्ति मुक्ति पाता॥
Gau Mataआरती श्री गैय्या मैंय्या की,आरती हरनि विश्व धैय्या की। अर्थकाम सद्धर्म प्रदायिनी,अविचल अमल मुक्तिपद्दायिनी। सुर मानव सौभाग्या विधायिनी,प्यारी पूज्य नन्द छैय्या की॥
Gayatri Mataआरती श्री गायत्रीजी की। ज्ञानदीप और श्रद्धा की बाती। सो भक्ति ही पूर्ति करै जहं घी की॥
Jaya Bhagirathanandiniजय जय भगीरथनन्दिनि,मुनि-चय चकोर-चन्दिनि, नर-नाग-बिबुध-बन्दिनि,जय जह्नुबालिका।
Lakshmi Mataॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥
Shri Annapurna Mataबारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके,कहां उसे विश्राम। अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारे,लेते होत सब काम॥
Shri Bagalamukhi Mataजय जय श्री बगलामुखी माता,आरति करहुँ तुम्हारी। पीत वसन तन पर तव सोहै,कुण्डल की छबि न्यारी॥ कर-कमलों में मुद्गर धारै,अस्तुति करहिं सकल नर-नारी॥
Shri Mahakali Mata'मंगल' की सेवा, सुन मेरी देवाहाथ जोड़, तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी, ध्वजा, नारियल,ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥
Shri Narmada Mataॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनंद कन्दी। ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा,शिव हरि शंकर रुद्री पालन्ती॥
Shri Shakambhari Mataहरि ॐ श्री शाकम्भर अम्बा जी कीआरती कीजो। ऐसो अद्भुत रूप हृदय धर लीजो,शताक्षी दयालु की आरती कीजो। तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप बखानी माँ।
Shailaputriशैलपुत्री माँ बैल असवार।करें देवता जय जयकार॥ शिव-शंकर की प्रिय भवानी।तेरी महिमा किसी ने न जानी॥
Brahmachariniजय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता।जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥ ब्रह्मा जी के मन भाती हो।ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
Chandraghantaजय माँ चन्द्रघण्टा सुख धाम।पूर्ण कीजो मेरे काम॥ चन्द्र समाज तू शीतल दाती।चन्द्र तेज किरणों में समाती॥
Kushmandaकूष्माण्डा जय जग सुखदानी।मुझ पर दया करो महारानी॥ पिङ्गला ज्वालामुखी निराली।शाकम्बरी माँ भोली भाली॥
Skandamataजय तेरी हो स्कन्द माता।पाँचवाँ नाम तुम्हारा आता॥ सबके मन की जानन हारी।जग जननी सबकी महतारी॥
Katyayaniजय जय अम्बे जय कात्यायनी।जय जग माता जग की महारानी॥ बैजनाथ स्थान तुम्हारा।वहाँ वरदाती नाम पुकारा॥
Kaalratriकालरात्रि जय जय महाकाली।काल के मुँह से बचाने वाली॥ दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा।महाचण्डी तेरा अवतारा॥
Mahagauriजय महागौरी जगत की माया।जय उमा भवानी जय महामाया॥ हरिद्वार कनखल के पासा।महागौरी तेरा वहा निवास॥
Siddhidatriजय सिद्धिदात्री माँ तू सिद्धि की दाता।तू भक्तों की रक्षक तू दासों की माता॥ तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि॥
Shri Chitraguptaॐ जय चित्रगुप्त हरे,स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्त जनों के इच्छित,फल को पूर्ण करे॥
Shri Kubera Jiॐ जै यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे। शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे॥
Brihaspati Devaऊँ जय बृहस्पति देवा,जय बृहस्पति देवा। छिन छिन भोग लगाऊँ,कदली फल मेवा॥
Pitaraji Maharajaजय जय पितरजी महाराज,मैं शरण पड़यो हूँ थारी। शरण पड़यो हूँ थारी बाबा,शरण पड़यो हूँ थारी॥ आप ही रक्षक आप ही दाता,आप ही खेवनहारे।
Pretarajaदीन दुखिन के तुम रखवाले,संकट जग के काटन हारे। बालाजी के सेवक जोधा,मन से नमन इन्हें कर लीजै।
Khatu Shyamajiॐ जय श्री श्याम हरे,बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत,अनुपम रूप धरे॥
Sai Babaआरती श्री साईं गुरुवर की,परमानन्द सदा सुरवर की। जा की कृपा विपुल सुखकारी,दुःख शोक, संकट, भयहारी॥
Shri Ravidasa Jiनामु तेरो आरती भजनु मुरारे,हरि के नाम बिनु झूठे सगल पसारे। नाम तेरा आसनो नाम तेरा उरसा,नामु तेरा केसरो ले छिटकारो।
Maa Bhadrakaliॐ जय भद्रकाली माता, मैया जय भद्रकाली माता। मंगल करणी देवी, सुख संपत्ति दाता॥
Maa Chamunda Deviॐ जय चामुंडे माता, मैया जय चामुंडे माता। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करन्ती॥
Maa Dhumavatiॐ जय धूमावती माता, मैया जय धूमावती माता। सप्तम महाविद्या तुम, संकट दुख हर्त्री॥
Maa Manasa Deviॐ जय मनसा माता, मैया जय मनसा माता। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करन्ती॥
Maa Matangiॐ जय मातंगी माता, मैया जय मातंगी माता। नौवीं महाविद्या तुम, जग सुख की दाता॥
Shri Agni Devॐ जय अग्नि देवा, स्वामी जय अग्नि देवा। सकल जगत के पावक, तुम हो सुखदेवा॥
Shri Bhuvaneshwari Deviॐ जय भुवनेश्वरी माता, मैया जय भुवनेश्वरी माता। त्रिभुवन स्वामिनी देवी, जग सुख की दाता॥
Shri Chinnamasta Deviॐ जय छिन्नमस्ते माता, मैया जय छिन्नमस्ते माता। प्रचण्ड चण्डिका देवी, जग सुख की दाता॥
Shri Godavari Mataॐ जय गोदावरी माता, मैया जय गोदावरी माता। त्रिंबक क्षेत्र उद्गम, पावन सुखदाता॥
Shri Hinglaj Mataॐ जय हिंगलाज भवानी, मैया जय हिंगलाज भवानी। हिंगोल तट पर राजत, त्रिभुवन सुखदानी॥
Shri Indra Devॐ जय इन्द्र देवा, स्वामी जय इन्द्र देवा। सुरपति देवधिपति, देव लोक दाता॥
Shri Jagannath Jiॐ जय जगन्नाथ स्वामी, जय जगन्नाथ स्वामी। प्रभु जय जगन्नाथ स्वामी। जय बलभद्र सुभद्रा, शिरोमणि स्वामी॥
Shri Kamakhya Deviॐ जय कामाख्या देवी, मैया जय कामाख्या देवी। नीलाचल पर राजत, त्रिभुवन सुखदाता॥
Shri Kaveri Mataॐ जय कावेरी माता, मैया जय कावेरी माता। सह्याद्रि-सुते देवी, पावन सुखदाता॥
Shri Renuka Mataॐ जय रेणुका माता, मैया जय रेणुका माता। जमदग्नि की गेहिनी, जग सुख की दाता॥