|| श्री जगन्नाथ जी की आरती ||
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी, जय जगन्नाथ स्वामी।
प्रभु जय जगन्नाथ स्वामी।
जय बलभद्र सुभद्रा, शिरोमणि स्वामी॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी...
रत्न सिंहासन राजत, पुरी धाम वासी।
दर्शन मात्र से काटे, यम की सब फाँसी॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी...
काष्ठ रूप धारी प्रभु, दारु ब्रह्म ज्ञानी।
पतित पावन जगदीश्वर, त्रिभुवन कल्याणी॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी...
नीलाचल पर राजत, भंजन दुख भारी।
अन्नपूर्णा महाप्रसाद, पावे सुखकारी॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी...
रथ यात्रा में राजत, पतितन हितकारी।
जो ध्यावे चरणन को, सो जन भवतारी॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी...
दीन अनाथ के स्वामी, कृपा करो भारी।
दास जनन की अरज, सुनियो बनवारी॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी...
जो जन आरती गावे, भक्ति भाव लावे।
कहैं शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥
ॐ जय जगन्नाथ स्वामी, जय जगन्नाथ स्वामी...

