उत्तराखंड की शांत और हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित कैंची धाम केवल एक मंदिर या आश्रम नहीं है। लाखों श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था, भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक शांति का पवित्र केंद्र है। यह स्थान महान संत नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके भक्त प्रेम से महाराज जी कहते हैं, से जुड़ा हुआ है।
नीम करोली बाबा ने अपने जीवन में किसी जटिल आध्यात्मिक दर्शन की अपेक्षा प्रेम, सेवा और ईश्वर-स्मरण को अधिक महत्व दिया। उनका संदेश अत्यंत सरल था—सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो और ईश्वर को याद रखो।
आज भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों से लोग कैंची धाम आते हैं। कोई बाबा का आशीर्वाद पाने आता है, कोई हनुमान जी के दर्शन के लिए, कोई अपने जीवन की परेशानियों के बीच शांति खोजने और कोई आध्यात्मिक प्रेरणा प्राप्त करने के लिए।
आइए जानते हैं नीम करोली बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं और कैंची धाम के आध्यात्मिक महत्व के बारे में।
नीम करोली बाबा कौन थे?
नीम करोली बाबा भारत के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत और हनुमान जी के परम भक्त माने जाते हैं।
उनका जन्म लक्ष्मण नारायण शर्मा के रूप में उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में हुआ था। उनके प्रारंभिक जीवन के बारे में उपलब्ध जानकारी सीमित है और उनसे जुड़ी अनेक बातें भक्तों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुनाई गई कथाओं के माध्यम से प्रसिद्ध हुई हैं।
भक्त उन्हें प्रेम से महाराज जी कहते थे।
उनका जीवन अत्यंत सरल था। वे अक्सर साधारण वस्त्र और कंबल में दिखाई देते थे। उनके लिए किसी व्यक्ति की संपत्ति, पद, प्रसिद्धि या सामाजिक स्थिति महत्वपूर्ण नहीं थी।
महाराज जी के पास हर प्रकार के लोग आते थे—गरीब, अमीर, ग्रामीण, विदेशी, विद्यार्थी, अधिकारी और आध्यात्मिक साधक।
उनकी शिक्षाओं का मूल भाव था कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल मंदिर जाने या धार्मिक अनुष्ठान करने में नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार में दिखाई देनी चाहिए।
नीम करोली बाबा नाम कैसे पड़ा?
नीम करोली बाबा का नाम उत्तर प्रदेश के एक स्थान से जुड़ा हुआ माना जाता है।
उनके जीवन से संबंधित कई कथाएं भक्तों के बीच प्रचलित हैं। समय के साथ उन्हें नीम करोली बाबा या नीब करौरी बाबा के नाम से जाना जाने लगा।
हालांकि महाराज जी स्वयं प्रसिद्धि से दूर रहते थे।
उनकी ख्याति किसी प्रचार अभियान के कारण नहीं फैली। लोग उनके पास आते, उनके प्रेम और करुणा का अनुभव करते और फिर उनके बारे में दूसरों को बताते।
धीरे-धीरे भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु उनके पास आने लगे और बाद में उनका संदेश दुनिया के दूसरे देशों तक भी पहुंचा।
नीम करोली बाबा और हनुमान जी
नीम करोली बाबा की आध्यात्मिक यात्रा में भगवान हनुमान का विशेष स्थान था।
हनुमान जी भक्ति, शक्ति, साहस, विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा के प्रतीक माने जाते हैं।
रामायण में हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन भगवान श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया। उन्होंने कभी अपनी शक्ति या उपलब्धियों का अहंकार नहीं किया।
यही सेवा और समर्पण की भावना नीम करोली बाबा की शिक्षाओं में भी दिखाई देती है।
उनके लिए ईश्वर से प्रेम केवल पूजा तक सीमित नहीं था।
यदि कोई व्यक्ति ईश्वर से प्रेम करता है, तो उसे ईश्वर की बनाई हुई सृष्टि और लोगों के प्रति भी करुणा रखनी चाहिए।
किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना भी सेवा है।
किसी दुखी व्यक्ति की सहायता करना भी सेवा है।
जरूरतमंद की मदद करना भी सेवा है।
अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार रहना भी सेवा का एक रूप हो सकता है।
इस प्रकार महाराज जी की आध्यात्मिकता दैनिक जीवन से जुड़ी हुई थी।
नीम करोली बाबा की प्रमुख शिक्षाएं
नीम करोली बाबा ने कोई जटिल धार्मिक सिद्धांत स्थापित नहीं किया। उनकी शिक्षाओं को अक्सर कुछ सरल शब्दों में समझा जाता है:
सबसे प्रेम करो।
सबकी सेवा करो।
ईश्वर को याद रखो।
ये शब्द सुनने में बहुत सरल लगते हैं, लेकिन यदि इन्हें वास्तव में जीवन में उतारा जाए तो व्यक्ति के सोचने और जीने का तरीका बदल सकता है।
सबसे प्रेम करो
हम अक्सर लोगों को अलग-अलग श्रेणियों में बांट देते हैं।
अपना और पराया।
अमीर और गरीब।
सफल और असफल।
दोस्त और दुश्मन।
लेकिन आध्यात्मिक प्रेम हमें इन सीमाओं से ऊपर उठना सिखाता है।
हर बात से सहमत होना आवश्यक नहीं है, लेकिन प्रत्येक व्यक्ति के प्रति मानवीय दृष्टिकोण और करुणा रखना आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सबकी सेवा करो
महाराज जी की शिक्षाओं में सेवा का विशेष महत्व है।
सेवा के लिए हमेशा धन की आवश्यकता नहीं होती।
आप अपने समय से किसी की सेवा कर सकते हैं।
अपने ज्ञान से किसी की सहायता कर सकते हैं।
किसी जरूरतमंद को भोजन दे सकते हैं।
किसी परेशान व्यक्ति की बात सुन सकते हैं।
किसी बुजुर्ग की मदद कर सकते हैं।
जब हम बिना किसी लाभ या प्रशंसा की अपेक्षा के किसी की सहायता करते हैं, तब वह कार्य निःस्वार्थ सेवा बन जाता है।
ईश्वर को याद रखो
आज का जीवन अत्यंत व्यस्त हो गया है।
मोबाइल, सोशल मीडिया, नौकरी, व्यवसाय, पढ़ाई और दैनिक जिम्मेदारियों के बीच हमारा मन लगातार व्यस्त रहता है।
ऐसे में प्रतिदिन कुछ समय ईश्वर के स्मरण के लिए निकालना मन को शांति दे सकता है।
कोई मंत्र जप सकता है।
कोई भगवान का नाम ले सकता है।
कोई ध्यान कर सकता है।
कोई भजन सुन सकता है।
कोई धार्मिक ग्रंथ पढ़ सकता है।
मार्ग अलग हो सकते हैं, लेकिन उद्देश्य अपने भीतर ईश्वर के प्रति प्रेम और स्मरण को जीवित रखना है।
कैंची धाम क्या है?
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल और आश्रम है।
यह सुंदर पहाड़ियों, पेड़ों और प्राकृतिक वातावरण से घिरी घाटी में स्थित है।
1960 के दशक में स्थापित यह आश्रम नीम करोली बाबा से जुड़े सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक बन गया।
“कैंची” नाम इस क्षेत्र की सड़क के विशेष मोड़ों से जुड़ा बताया जाता है, जो कैंची के आकार जैसे दिखाई देते हैं।
लेकिन श्रद्धालुओं के लिए कैंची धाम का अर्थ इससे कहीं अधिक है।
यह उनके लिए महाराज जी की स्मृतियों, हनुमान जी की भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक शांति से जुड़ा स्थान है।
कैंची धाम का आध्यात्मिक वातावरण
कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहां लोग केवल घूमने जाते हैं।
कुछ स्थान ऐसे होते हैं जहां लोग कुछ महसूस करने जाते हैं।
कैंची धाम को अनेक श्रद्धालु दूसरी श्रेणी में रखते हैं।
उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण यहां का प्राकृतिक वातावरण मन को शांत करने में सहायता करता है।
श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करते हैं, प्रार्थना करते हैं, हनुमान जी का स्मरण करते हैं और महाराज जी को याद करते हैं।
हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है।
कोई अपने जीवन की समस्या लेकर आता है।
कोई सफलता के लिए धन्यवाद देने आता है।
कोई मानसिक शांति चाहता है।
कोई आध्यात्मिक मार्ग खोज रहा होता है।
और कोई केवल कुछ समय भगवान के चरणों में बैठना चाहता है।
कई बार आध्यात्मिक अनुभव किसी असाधारण घटना में नहीं, बल्कि कुछ क्षणों की गहरी शांति में मिलता है।
कैंची धाम का प्रसिद्ध भंडारा
कैंची धाम से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक आयोजन 15 जून का भंडारा है।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कैंची धाम पहुंचते हैं।
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में भंडारे का विशेष महत्व है।
यह केवल लोगों को भोजन कराने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि सेवा की भावना का प्रतीक है।
अनेक सेवक मिलकर भोजन तैयार करने, प्रसाद बांटने और श्रद्धालुओं की सेवा में योगदान देते हैं।
अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमि से आए लोग एक साथ प्रसाद ग्रहण करते हैं।
यह महाराज जी की शिक्षाओं को व्यवहार में दिखाता है—मानवता की सेवा भी ईश्वर की सेवा है।
नीम करोली बाबा की विदेशों में प्रसिद्धि
नीम करोली बाबा की शिक्षाओं का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा।
1960 और 1970 के दशक में अनेक विदेशी आध्यात्मिक साधक भारत आए। वे भारतीय दर्शन, योग, ध्यान और आध्यात्मिकता को समझना चाहते थे।
इन्हीं में से कुछ लोग नीम करोली बाबा के संपर्क में आए।
उनके प्रसिद्ध विदेशी भक्तों में राम दास, जिनका पहले नाम रिचर्ड अल्पर्ट था, विशेष रूप से जाने जाते हैं।
महाराज जी के साथ उनके अनुभवों ने उनकी आध्यात्मिक यात्रा को गहराई से प्रभावित किया।
बाद में उनकी पुस्तकों और शिक्षाओं के माध्यम से दुनिया भर के अनेक लोगों ने पहली बार नीम करोली बाबा के बारे में जाना।
महाराज जी की शिक्षाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनका मूल संदेश किसी एक देश तक सीमित नहीं था।
प्रेम, सेवा, करुणा और ईश्वर का स्मरण ऐसी बातें हैं जिन्हें दुनिया के किसी भी हिस्से का व्यक्ति समझ सकता है।
स्टीव जॉब्स और कैंची धाम
कैंची धाम का नाम आधुनिक समय में प्रसिद्ध उद्योगपतियों और टेक्नोलॉजी जगत की हस्तियों से जुड़ी कहानियों के कारण भी चर्चा में आया।
Apple के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स अपनी युवावस्था में आध्यात्मिक खोज के उद्देश्य से भारत आए थे।
उनकी भारत यात्रा और नीम करोली बाबा से जुड़े क्षेत्र की यात्रा के बारे में कई जगह उल्लेख मिलता है। हालांकि जब वे पहुंचे, तब तक महाराज जी शरीर छोड़ चुके थे।
फिर भी उनकी भारत यात्रा उनके जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों में गिनी जाती है।
बाद में Facebook के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने भी सार्वजनिक रूप से बताया कि कंपनी के कठिन समय के दौरान स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत में एक मंदिर जाने की सलाह दी थी।
इन घटनाओं के बाद कैंची धाम का नाम नई पीढ़ी और टेक्नोलॉजी जगत में भी काफी लोकप्रिय हुआ।
लेकिन कैंची धाम का वास्तविक महत्व किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की यात्रा से नहीं है।
इसकी मूल पहचान भक्ति, सेवा और आध्यात्मिकता है।
नीम करोली बाबा के चमत्कारों की कथाएं
नीम करोली बाबा से जुड़ी अनेक चमत्कारिक कथाएं भक्तों के बीच प्रसिद्ध हैं।
कई भक्तों ने ऐसे अनुभवों का वर्णन किया है जिनमें महाराज जी को ऐसी बातों का ज्ञान होता था जो उन्हें किसी ने बताई नहीं थीं।
कुछ लोगों ने कठिन परिस्थितियों में अप्रत्याशित सहायता मिलने की घटनाएं साझा कीं।
कई श्रद्धालु इन्हें महाराज जी की कृपा और ईश्वर की शक्ति से जोड़कर देखते हैं।
इन घटनाओं के प्रति अलग-अलग लोगों की अलग मान्यताएं हो सकती हैं।
लेकिन महाराज जी की शिक्षा का केंद्र चमत्कार नहीं था।
उनका मुख्य संदेश व्यक्ति के भीतर परिवर्तन लाना था।
यदि क्रोधित व्यक्ति शांत होना सीख जाए, तो वह भी एक बड़ा परिवर्तन है।
यदि स्वार्थी व्यक्ति सेवा करना सीख जाए, तो वह भी आध्यात्मिक प्रगति है।
यदि निराश व्यक्ति के भीतर फिर से आशा जाग जाए, तो वह भी उसके जीवन का चमत्कार हो सकता है।
सेवा की शक्ति
नीम करोली बाबा की शिक्षाओं में सेवा केवल एक धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है।
आज दुनिया में अधिकतर कार्य किसी न किसी लाभ से जुड़े होते हैं।
हम अक्सर सोचते हैं:
मुझे इससे क्या मिलेगा?
लोग मेरी प्रशंसा करेंगे या नहीं?
मुझे इसका क्या फायदा होगा?
लेकिन निःस्वार्थ सेवा हमें अलग तरीके से सोचने के लिए प्रेरित करती है।
किसे मेरी सहायता की आवश्यकता है?
मैं किसके काम आ सकता हूं?
मैं किसी का दुख कैसे कम कर सकता हूं?
मेरे पास जो ज्ञान, समय या संसाधन हैं, उनसे किसी दूसरे व्यक्ति का जीवन कैसे बेहतर हो सकता है?
यही सोच धीरे-धीरे हमारे भीतर करुणा और विनम्रता को बढ़ाती है।
आज के समय में नीम करोली बाबा की शिक्षाओं का महत्व
दुनिया तेजी से बदल रही है।
हमारे पास स्मार्टफोन हैं, सोशल मीडिया है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है और कुछ ही सेकंड में दुनिया भर की जानकारी उपलब्ध हो जाती है।
लेकिन तकनीक के विकास के बावजूद इंसान की कई मूल समस्याएं आज भी वैसी ही हैं।
चिंता।
डर।
क्रोध।
अकेलापन।
भविष्य की चिंता।
रिश्तों की समस्याएं।
पैसे और करियर का तनाव।
जानकारी बढ़ गई है, लेकिन जरूरी नहीं कि उसी अनुपात में हमारे मन की शांति भी बढ़ी हो।
इसीलिए महाराज जी का सरल संदेश आज भी प्रासंगिक है।
मन को कुछ समय शांत रखें
दिन में कुछ मिनट मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहकर ध्यान, प्रार्थना या नाम जप करें।
दूसरों से तुलना कम करें
हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली जिंदगी हमेशा पूरी वास्तविकता नहीं होती।
कृतज्ञता का अभ्यास करें
हमारे पास जो है, उसके लिए ईश्वर को धन्यवाद देना सीखें।
बिना अपेक्षा के किसी की मदद करें
किसी ऐसे व्यक्ति की सहायता करें जिससे आपको बदले में कुछ मिलने की उम्मीद न हो।
प्रतिदिन ईश्वर का स्मरण करें
केवल परेशानी के समय ही भगवान को याद न करें।
सुख और दुख दोनों में ईश्वर का स्मरण आध्यात्मिक जीवन को मजबूत बनाता है।
कैंची धाम की यात्रा
कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित है और सड़क मार्ग से यहां पहुंचा जा सकता है।
कुमाऊं क्षेत्र की यात्रा करने वाले लोगों के लिए काठगोदाम एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। वहां से सड़क मार्ग के माध्यम से नैनीताल, भवाली और कैंची धाम क्षेत्र की ओर यात्रा की जा सकती है।
यदि आप कैंची धाम जाने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले वर्तमान सड़क स्थिति, मौसम, मंदिर का समय और ठहरने की व्यवस्था की जानकारी अवश्य जांच लें।
विशेष रूप से 15 जून के वार्षिक भंडारे के आसपास यहां बहुत अधिक भीड़ हो सकती है।
कैंची धाम को केवल पर्यटन स्थल की तरह देखने के बजाय इसकी धार्मिक और आध्यात्मिक गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
जहां मौन रखने के निर्देश हों, उनका पालन करें।
आश्रम के नियमों का सम्मान करें।
स्वच्छता बनाए रखें।
दर्शन और प्रार्थना कर रहे दूसरे श्रद्धालुओं का ध्यान रखें।
कैंची धाम जाकर क्या मांगना चाहिए?
मंदिर जाते समय हमारे मन में कई इच्छाएं हो सकती हैं।
नौकरी चाहिए।
व्यापार में सफलता चाहिए।
स्वास्थ्य अच्छा हो।
परिवार खुश रहे।
विवाह हो जाए।
परीक्षा में सफलता मिले।
आर्थिक समस्या दूर हो जाए।
भगवान से अपनी परेशानियों के लिए सहायता मांगना स्वाभाविक है।
लेकिन इसके साथ एक और प्रकार की प्रार्थना भी की जा सकती है।
हे प्रभु, मुझे सही निर्णय लेने की बुद्धि देना।
कठिन समय में धैर्य देना।
सफलता मिलने पर विनम्रता देना।
दूसरों की सहायता करने की भावना देना।
जिस परिस्थिति को मैं बदल नहीं सकता, उसे स्वीकार करने की शक्ति देना।
ऐसी प्रार्थनाएं परिस्थितियों के साथ-साथ हमारे भीतर भी परिवर्तन लाने में सहायक हो सकती हैं।
वास्तविक तीर्थ यात्रा क्या है?
तीर्थ यात्रा केवल सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके मंदिर तक पहुंच जाने का नाम नहीं है।
वास्तविक यात्रा उस समय शुरू होती है जब हम मंदिर से वापस घर आते हैं।
यदि किसी पवित्र स्थान की यात्रा करने के बाद भी हमारे भीतर वही क्रोध, अहंकार, लालच और ईर्ष्या बनी रहे, तो हमारी बाहरी यात्रा पूरी हुई लेकिन अंदर की यात्रा अभी बाकी है।
एक आध्यात्मिक यात्रा हमें कुछ न कुछ सिखाकर जानी चाहिए।
थोड़ा अधिक धैर्य।
थोड़ा अधिक प्रेम।
थोड़ी अधिक सेवा।
थोड़ी कम चिंता।
थोड़ा कम अहंकार।
और ईश्वर के प्रति थोड़ा अधिक विश्वास।
कैंची धाम जाए बिना महाराज जी की शिक्षाओं को कैसे अपनाएं?
हर व्यक्ति उत्तराखंड जाकर कैंची धाम के दर्शन नहीं कर सकता।
लेकिन महाराज जी की शिक्षाओं को अपनाने के लिए कैंची धाम पहुंचना आवश्यक नहीं है।
सुबह उठकर मोबाइल देखने से पहले कुछ मिनट भगवान को याद करें।
प्रतिदिन नाम जप या ध्यान करें।
किसी जरूरतमंद को भोजन दें।
किसी जानवर को खाना खिलाएं।
अपने माता-पिता और बुजुर्गों के साथ समय बिताएं।
किसी परेशान व्यक्ति की बात सुनें।
जहां संभव हो, क्रोध को नियंत्रित करें।
किसी की सहायता करके उसका प्रचार न करें।
रात को सोने से पहले ईश्वर का धन्यवाद करें।
छोटे-छोटे कार्य लगातार किए जाएं तो वे हमारे जीवन में बड़ा आध्यात्मिक परिवर्तन ला सकते हैं।
नीम करोली बाबा को आज भी लोग क्यों याद करते हैं?
नीम करोली बाबा ने 1973 में अपना शरीर त्याग दिया था, लेकिन आज भी दुनिया भर में उनके लाखों भक्त और अनुयायी हैं।
ऐसे लोग भी उनकी शिक्षाओं से प्रभावित हो रहे हैं जिन्होंने महाराज जी को कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा।
कोई उनके बारे में किसी पुस्तक में पढ़ता है।
कोई अपने माता-पिता से सुनता है।
कोई इंटरनेट पर उनके बारे में जानता है।
कोई राम दास की आध्यात्मिक यात्रा के माध्यम से उनके बारे में जानता है।
और कोई कैंची धाम की यात्रा के दौरान पहली बार महाराज जी से परिचित होता है।
शायद उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी शिक्षाओं की सरलता है।
प्रेम करो।
सेवा करो।
ईश्वर को याद करो।
इन तीन बातों को समझना आसान है, लेकिन इन्हें पूरी तरह जीवन में उतारना अपने आप में एक आध्यात्मिक साधना है।
निष्कर्ष
नीम करोली बाबा का जीवन हमें याद दिलाता है कि आध्यात्मिकता को हमेशा कठिन या जटिल होने की आवश्यकता नहीं है।
ईश्वर की ओर पहला कदम बहुत सरल हो सकता है।
किसी से प्रेम से बात करना।
किसी जरूरतमंद की सहायता करना।
अपने क्रोध को नियंत्रित करना।
किसी भूखे व्यक्ति को भोजन देना।
कुछ समय ईश्वर का नाम लेना।
अपने जीवन के लिए कृतज्ञ होना।
यही छोटे कार्य धीरे-धीरे हमारे भीतर बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं।
उत्तराखंड की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच स्थित कैंची धाम आज भी लोगों को भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक शांति की ओर प्रेरित करता है।
कोई वहां महाराज जी का आशीर्वाद खोजता है।
कोई हनुमान जी के दर्शन करने जाता है।
कोई अपने प्रश्नों का उत्तर खोजता है।
और कोई केवल मन की शांति चाहता है।
लेकिन शायद इस पूरी आध्यात्मिक यात्रा का सबसे गहरा संदेश यही है कि जिस शांति को हम बाहर खोज रहे हैं, उसकी शुरुआत अंततः हमारे अपने भीतर से होती है।
सबसे प्रेम करो।
सबकी सेवा करो।
ईश्वर को याद रखो।
यही नीम करोली बाबा की शिक्षाओं का सरल और सुंदर सार है।
